
यह बोलकर उन्होंने कॉल कट कर दिया। आशा जी ये नहीं चाहती थीं कि कनक जी एकाग्र के साथ कुछ भी करें, क्योंकि एकाग्र भी तो उनके घर का बेटा था। लेकिन इस वक्त हर कोई वज्र के लिए परेशान था और सबका शक एकाग्र पर ही जा रहा था।
क्योंकि शुरू से ही एकाग्र ने अपने पागलपन को दिखाना शुरू कर दिया था। बात अलग थी कि सबको ये समझने में थोड़ा वक्त लगा। जिस तरह से उसने अभीर से शादी की थी, उसके बाद किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।






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