
अविरा समझ नहीं पा रही थी कि एकाग्र की बात माने या न माने। उसकी बातों से इतना तो साफ था कि उसे चोट आई थी और वह कुछ छिपा रहा था। लेकिन जिस तरह से वह सवाल कर रहा था, उससे अविरा के मुंह से आवाज तक नहीं निकल पा रही थी।
एकाग्र ने कार रोक दी। वह जानता था कि उसका ध्यान पूरी तरह अविरा पर चला जाएगा। वह कोई एक्सीडेंट नहीं करना चाहता था। ऊपर से अविरा को लेकर वह कोई भी रिस्क नहीं ले सकता था।






Write a comment ...