शुभ लक्ष्मी जी खुश थीं। अपने बेटे के रिश्ते को उन्होंने तय कर दिया था। लेकिन यहाँ पर निधि भागते हुए आई और अंदर आते हुए आश्वि की तरफ देखकर बोली, "ये यहाँ पर सर्वेंट का काम करती है ना? तू तो ये तुझे गलत क्यों लग रही है?"
तो शुभ लक्ष्मी जी मुस्कुरा कर बोलीं, "हाँ, करती थी। अब वो इस घर की होने वाली बहू है। इसलिए उसका हक है मेरे सीने से लगने का।"
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