अनिरुद्ध वंशिका को चुपचाप वैसे ही पकड़ कर खड़ा था और सबके सामने ही अपने गाल से उसके गाल को रगड़ रहा था, जिसकी वजह से वसुधा जी को गुस्सा आ रहा था। वो जानती थीं कि उनका बेटा पागल हो रहा था, लेकिन जो गलत था, वो गलत था। वंशिका यहाँ किसलिए आई थी? अपने बेटे के लिए। उसे देखने के लिए, उसे अपने सीने से लगाने के लिए... पर ये क्या? अनिरुद्ध की तरफ उसकी ही आग कभी खत्म नहीं होती।
अनिरुद्ध इस वक्त बस वंशिका को चाहता था। तभी वसुधा जी गुस्से में बोलीं, "अनिरुद्ध, वंशिका को छोड़ो और जाने दो उसे! वो हमारे रुद्धव के लिए आई है! इस वक्त रुद्धव को अपनी माँ की ज़रूरत है। इतने वक्त के बाद वो मिला है, वैसे भी इस फैमिली में वो बहुत इनसिक्योर फील कर रहा है वंशिका के बिना।"
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