आश्वी ने सामने देखा तो शुभ लक्ष्मी जी खड़ी थीं। उन्हें इतनी बुरी तरह धक्का दिया गया था कि वो लड़खड़ा गईं। शुभ लक्ष्मी जी ने तुरंत आश्वी को उठाया और किरण जी की ओर देखते हुए गुस्से में बोलीं, "क्या आपके घर में लड़कियों की इज्जत ऐसे ही की जाती है?"
किरण जी नाराज होते हुए बोलीं, "आप होतीं, तो इन्हीं की तरह बात करतीं! और वैसे भी, तुम जैसी औरतों को मैं अच्छे से जानती हूँ—दूसरों के घर जाकर ज्ञान झाड़ती हो और अपने घर में महारानी बनकर घूमती हो। वैसे, शक्ल और कपड़े देखकर तो लग रहा है कि अच्छे घर से हो, तो फिर यहाँ क्या कर रही हो? जाओ अपने महल में!"
Write a comment ...