रुद्धव टॉवेल पहनकर वैसे ही खड़ा होकर वंशिका को मुंह बनाकर देख रहा था, जैसे उसकी माँ ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया हो। वसुधा जी हैरान थीं, क्योंकि सारी दुनिया को छोड़कर वंशिका हमेशा रुद्धव पर ही ध्यान देती थी। रुद्धव के अलावा उसकी लाइफ में कोई इतना मैटर ही नहीं करता था—शायद अनिरुद्ध भी नहीं। इतना पागलपन था उसके प्यार में रुद्धव के लिए। लेकिन आज, जब रुद्धव उसके सामने खड़ा था, वंशिका रोते हुए वहाँ से निकल गई थी।
वसुधा जी नीचे आईं। वो समझ सकती थीं कि ये सब क्यों हुआ था, लेकिन फिर भी दर्द में थीं, क्योंकि रुद्धव की आँखों में आँसू आ गए थे, और वो ये देख नहीं पा रही थीं। वो चिल्लाकर अनिरुद्ध को बुलाने लगीं, लेकिन अनिरुद्ध अपने बिस्तर पर लेटा बस वंशिका को मिस कर रहा था।
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